छुपी हुई झील
Well done!
घने और शांत जंगल में एक छोटा सा हाथी रहता था, जिसका नाम था एली। एली बाकी हाथियों से छोटा था, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था और उसकी सोच बहुत समझदार थी।
हर सुबह जंगल के सभी जानवर नदी के किनारे पानी पीने आते थे। एक गर्मी में सूरज बहुत तेज़ चमका और कुछ ही दिनों में नदी का पानी लगभग खत्म हो गया। जानवर घबरा गए।
“पानी नहीं होगा तो हम कैसे जिएंगे?” हिरन ने चिंता से कहा।
“शायद बारिश हो जाए,” बंदरों ने उम्मीद जताई।
लेकिन आसमान साफ था—कहीं बादल नहीं।
एली ने बहुत देर तक सोचा। उसे अपनी दादी की एक पुरानी बात याद आई—जंगल के भीतर कहीं एक छुपी हुई झील है। किसी ने उस झील को कभी नहीं देखा था, लेकिन एली ने उसे ढूंढने का निश्चय किया।
वह पुराने हाथियों के रास्तों पर चलता गया, काँटों वाली झाड़ियों को पार करता गया, गिरे हुए पेड़ों के ऊपर चढ़ता गया। लंबी यात्रा के बाद उसे एक धीमी-सी आवाज़ सुनाई दी—पानी की आवाज़!
एली दौड़ता हुआ आगे बढ़ा और उसने देखा कि सूरज की रोशनी में एक खूबसूरत झील चमक रही है।
एली वापस जानवरों के पास आया और खुशी से चिल्लाया, “मुझे पानी मिल गया! सब मेरे साथ चलो!”
सभी जानवर थके थे, लेकिन उन्हें एली पर भरोसा था। वे उसके पीछे-पीछे चले और जब झील तक पहुँचे तो खुशी से झूम उठे।
“तुमने हमें बचा लिया, एली!” शेर ने कहा।
बड़ा हाथी मुस्कुराया और बोला, “बड़ा होना ज़रूरी नहीं। हिम्मत और दया ही सबसे बड़ी ताकत है।”
उस दिन से एली को जंगल में बुद्धिमान छोटा हाथी कहा जाने लगा।
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