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गुदगुदी क्लब - बच्चों की मनोरंजक दुनियाँ

स्नेह बरसाता, ज्ञान बढ़ाता,
सुसंस्कार जगाता, बच्चों का
मनोरंजक प्लेग्राउंड

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बच्चों की डिजिटल दुनियाँ में आपका स्वागत है

यह वैब पोर्टल बच्चों का एक अनोखा संसार है। यह संसार उनके लिए ज्ञानवर्धक है, मनोरंजक है और सुसंस्कारों का आधार भी है। यहाँ खेल-खेल में बच्चे नयी नयी चीजें सीखते हैं, प्रतिभाओं क्षमताओं को विकसित करते हैं और गुणवान बनते हैं।

उनका यह संसार अनेकों शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी-विषेशज्ञों, साहित्य रचनाकारों एवं मनोवैज्ञानिकों ने कुछ इस प्रकार बनाया है कि यहाँ उपलब्ध सामग्री बच्चों को श्रेष्ठता के प्रति आकर्षित कर सके, उनके मनोभावों, विचारों औरआचरण में भली-भाँति रच-बस सके, जिससे कि आगे चल कर श्रेष्ठता उनके व्यक्तित्व में परलक्षित हो सके। यही इच्छा तो उनके माता पिता, अभिभावकों एवं गुरुजनों की भी होती है।

हम जानते हैं कि हर बच्चे के अन्दर, श्रेष्ठता का बीज पहले से ही पड़ा होता है। ईश्वर उस बीज को उसके अंदर रोप कर ही उसे इस संसार में भेजता है। श्रेष्ठता के बीज को विकसित होने के लिए श्रेष्ठ वातावरण की आवश्यकता होती है। वह वातावरण न मिलने से वह बीज सूख जाता है। वह बड़ा नहीं हो पाता।
हमारी इच्छा है कि हम उस बीज के लिए ऐसा वातावरण तैयार करें जिसमें उसका सर्वांगीण विकास हो सके।

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यहाँ क्या है?

हमने यहाँ बच्चों के लिए दुनियाँ का सर्वश्रेष्ठ साहित्य एकत्र किया है। यह साहित्य श्रेष्ठ होने के साथ-साथ, ज्ञानवर्धक है और मनोरंजक भी है।

यहाँ अनेकों कहानीकारों की श्रेष्ठतम रचनाएँ हैं। बच्चों द्वारा रचित मनोरंजक कहनियाँ और कविताएं हैं। इतिहास के पन्नों से चुनी, प्रसिद्व लेखकों की रचनाएं हैं। यह कहानियाँ अनेकों बच्चों के दिलों को पहले ही गुदगुदा चुकी हैं और प्रेरणाएं दे चुकी हैं।

अपना प्रभाव दिखाने और अपनी प्रमाणिकता सिद्व करने के पश्चात् ही इस सामग्री ने अन्य बच्चों तक पहुँचने के लिए ही हमसे इस वैब पोर्टल का निर्माण कराया है और मुक्त कंठ से, सभी सृजन कर्ताओं का आवहन करवाया है कि यदि वह उनके लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो वह हमसें संपर्क करें। हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। उनसे जुड़ कर ही, बच्चों का यह संसार बड़ा होगा और वह अच्छे इंसान के रूप में विकसित होंगे।

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सद्प्रेरणाओँ का एक उदाहरण

इस वैब पोर्टल पर परोपकार शीर्षक वाली एक कहानी है। उसेआप यहाँ पढ़ सकते हैं। यह कहानी जुगनुओं के माध्यम से बच्चों को यह बताती है कि कैसे किसी एक व्यक्ति द्वारा किया गया, छोटा सा कार्य, दूसरे व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी मदद बन जाता है और उसके जीवन की दिशा ही बदल देता है। कहानी पढ़ कर प्रेरणा होती है कि हम भी कुछ अच्छा करें और दूसरों के जीवन को प्रभावित करें।

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यहाँ उल्लेखनीय है - इस कहानी से बच्चों के अंतरमन में उठी सद्प्रेरणा, जिसने किसी गरीब बालक के आगामी-जीवन को बचा लिया। एक अनूठी पहल करके उसके जीवन को हमेशा के लिए संवार दिया।

बात यूँ है कि: जुगनुओं की यह कहानी, बच्चों के अखबार, ‘‘सफलता’’ के माध्यम से, उत्तर प्रदेश कि एक बहुत छोटे से गाँव में चल रहे कदनपुर शिक्षा केन्द्र पर पहुँची।

इस केंद्र के बच्चे , इस अखबार में छपे हर लेख एवं कहानी को बड़े ध्यान से पढते हैं। उन्होंने परोपकार कहानी को भी पूरे मन से पढा था । कहानी ने उनके बाल मन को प्रभावित किया और अच्छे काम करने का बीज उनके अन्तरमन में डाल दिया।

इसी बीच, उनकी ही कक्षा में पढने वाले एक विद्यार्थी का हाँथ टूट गया। बच्चे के अभिभावक, अति आभाव ग्रस्त थे। वह अपने बेटे का उपचार कराना तो दूर, उसे चिकित्क को दिखाने की हालत में भी नहीं थे।

इलाज न होने का मतलब था, जीवनभर का शारीरिक विकार। परन्तु परोपकार कहानी पहले ही कक्षा के सभी बच्चों के अन्दर सद्प्रेरणा का बीज डाल चुकी थी। सभी बच्चों ने, उस चोटिल बच्चे के लिए, घर घर जा कर पैसे एकत्र किए, उसका इलाज हुआ और उसका हाँथ भी ठीक हुआ । कहानी लिखने का उद्देश्य पूरा हुआ।

इस घटना का एक संक्षिप्त वीडियो, वहाँ के केन्द्र संस्थापक ने हमें भेजा जो यहाँ, उदाहरण के लिए यहाँ प्रस्तुत किया गया है। यहाँ की हर कहानी, पहले ही किसी न किसी बच्चे को प्रेरित कर चुकी है । हम आशा करते हैं की आगे आने वाली हर कहानी अन्य बालकों को भी इसी प्रकार प्रेरित करती रहेगी।

एक दर्शनिक का कथन

दुनियाँ के एक प्रसिद्ध दार्शनिक ने एक बार कहा था कि ‘‘ तुम मुझे बताओ कि तुम क्या पढते हो, तो मै बताऊँगा कि तुम कौन हो और भविष्य में क्या बनोगे’’।
शायद वह दार्शनिक व्यक्ति, सशक्त वाक्यों के माध्यम से हमें यह बताना चाहता था कि व्यक्ति जो पढता है, वही उसके चरित्र का निर्माण करता है। आगे वही पढ़ी गयी सामग्री, उसकी किस्मत बनाती है।
इसे आप दूसरे शब्दों में यूँ कह सकते हैं कि, सिद्धान्त अत्यन्त सरल है। ‘‘अच्छी किस्मत, अच्छा पढ़ने से ही बनती है’’।
हम सभी बच्चों को अच्छी एवं मनोरंजक पाठ्य सामग्री उपलब्द्ध करा कर उन्हें अच्छा इन्सान बनाना चाहते हैं।

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रेस टू रीड कार्यक्रम

हमारा रेस टू रीड कार्यक्रम, हिंदी के मुहावरे, "आम के आम, गुठली के दाम " को चरितार्थ करता है। हम इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के अंदर अच्छा पढ़ने और अच्छा लिखने की आदत तो डालते ही हैं साथ में उन्हें इसके लिए पुरस्कृत भी करते हैं। हमरी मान्यता है कि यदि बच्चे, लम्बे समय तक अच्छा पढ़ते हैं और अच्छा लिखते हैं तो न केवल उनकी प्रतिभाएँ छमताएँ विकसित होती हैं अपितु उनके अंदर अच्छे संस्कार भी पडने लगते हैं । ऐसा हो, यही तो हमारा उद्देश्य है।

विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करिये।

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यदि आप बच्चों को श्रेष्ठ साहित्य पढ़ने के लिए उपलब्ध करना चाहते हैं तो आप अपने विषय में हमें बताइए। नीचे दिए गए फार्म को भरिये, और सबमिट करिये। अपने फार्म के साथ अपनी लिखी हुई रचना को भी संलगन करिये।
हमारा संपादक समूह आपकी रचना की विवेचना करेगा और यदि आपकी रचना इस पोर्टल में सम्मिलित करने योग्य पाई गई तो हम आपको सूचित करेंगे और आपकी रचना को इस वैब पोर्टल पर पब्लिश भी करेंगे तथा आगे के लिए और जानकारी भेजेंगे ।



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हमारे विषय में

अच्छा इंसान बनने के लिए कोई निश्चित पाठ्यपुस्तक नहीं होती। एक अच्छा मनुष्य भीतर से जागने वाली प्रेरणा से बनता है। यह प्रेरणा अच्छी और सार्थक साहित्य पढ़ने से उत्पन्न होती है। उत्तम साहित्य हमारे विचारों और मूल्यों को सही दिशा देता है। हमारा उद्देश्य केवल बच्चों तक अच्छा साहित्य पहुँचाना है, ताकि वे स्वयं प्रेरित होकर बेहतर इंसान बन सकें।

  • सच्चा इंसान बनने के लिए कोई किताब नहीं होती,
    ये सीख दिल की बातों से जन्म लेती है।
    जब अच्छे शब्द मन को छू जाते हैं,
    तो भीतर एक उजली लौ जलती है।

    साहित्य के पन्नों में छिपी होती है प्रेरणा,
    जो चुपके से जीवन को संवार देती है।
    हम तो बस राह दिखाते हैं बच्चों को,
    अच्छी किताबें ही उन्हें महान बना देती हैं।