बच्चों की डिजिटल दुनियाँ में आपका स्वागत है
यह बच्चों का वैब पोर्टल नहीं, उनका एक अनोखा संसार है। यह संसार अनेकों षिक्षा विदों प्रौद्योगिकी विषेशयों, साहित्य रचनाकारों एवं मनोवैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल है।
इस संसार को निर्मित करने का मुख्य उद्देष्य है कि बच्चे इस संसार से आत्मसात करें, यहाँ पर उलब्द्ध सामग्री का सही अर्थो में उपयोग करें, और उनमें बसी सद्भावओं की सुरभि से अपनी सोच और व्यवहार को महकाएं। हमारा मानना है कि ऐसा करते करते वह स्वतः ही एक अच्छे इंसान के रूप में बड़े हो जाएंगे।
ऐसे इन्सान जो मानवता को परिभाशित करते हैं।
14+
7K+
15+
- We believe every child is intelligent so we care.
- Teachers make a difference of your child.
यहाँ क्या है?
अभी यहाँ के लिए कुछ प्रेरणादायक कहानियाँ हैं। बच्चों द्वारा रचित मनोरंजक कविताएं है और इतिहास के पन्नों से चुनी प्रसिद्व लेखकों की रचनाएं हैं। यह कहानियाँ अनेकों बच्चों के दिलों को पहले ही गुदगुदा चुकी हैं उन्हे हँसा चुकी है।
अपना प्रभाव दिखाने और अपनी प्रमाणिकता सिद्व करने के पश्चात् ही इस सामग्री ने बच्चे बच्च्े तक पहुँचने के लिए हमसे इस वैब पोर्टल का निर्माण कराया है और मुक्त कंठ से, सभी सृजन कर्ताओं का आवहन किया है कि यदि वह बच्चों के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो वह हमसें संपर्क करें। हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। उनसे जुड़ कर ही, बच्चों का यह संसार बड़ा होगा और वह अच्छे इंसान के रूप में विकसित होंगे।
सद्प्रेरणाओँ का एक उदाहरण
इस वैब पोर्टल पर परोपकार षीर्शक वाली कहानी प्रकाषित है। यह कहानी जुगनुओं के माध्यम से बच्चों को यह बताती है कि कैंसे किसी एक के द्वारा किया गया छोटा सा कार्य, दूसरे के लिए बहुत बड़ी मदद बन जाता है। षायद इतनी बड़ी मदद कि दूसरे व्यक्ति, इसके विशय में कल्पना भी नही कर पाता है।
यह कहानी, आप और बच्चे या अन्य कोई व्यक्ति यहाँ पढ सकता है।
यहाँ उल्लेखनीय है, इस कहानी से, बच्चों के अंतरमन में उठी सद्प्रेरणा, जिसने उसी गाँव के किसी दूसरे बालक के आगामी जीवन को क्षतिग्रस्त होने से बचा दिया और एक अनूठी पहल करके उसे हमेषा हमेषा के लिए संवार दिया।
बात यूँ है कि यह कहानी बच्चों के अखबार ‘‘सफलता’’ के माध्यम से उत्तर प्रदेष कि एक बहुत छोटे से गाँव कदनपुर के षिक्षा केन्द्र पर पहुँची।
बच्चे इस अखबार में छपे हर लेख एवं कहानी को बड़े ध्यान से पढते हैं। उन्होंने परोपकार कहानी को भी पूरे मन से पढा। कहानी ने उनके बाल मन को प्रभावित किया और अच्छे काम करने का बीज उनके अन्तरमन में डाल दिया।
इसी बीच, उनकी ही कक्षा में पढने वाले एक विद्यार्थी का हाँथ टूट गया। बच्चे के अभिभावक, अति आभाव ग्रस्त थे। वह अपने बेटे का उपचार कराना तो दूर, उसे चिकित्क को दिखाने की भी माली हालत में न थे।
इलाज न होने का मतलब था, जीवनभर का षारीरिक विकार। परन्तु परोपकार कहानी पहले ही कक्षा के सभी बच्चों के अन्दर सद्प्रेरणा का बीज डाल चुकी थी।
सभी बच्चों ने, उस चोटिल बच्चे के लिए घर घर जा कर पैसे एकत्र किए, उसका इलाज हुआ और उसका हाँथ ठीक हो चुका है।
इस घटना का एक संक्षिप्त वीडियो वहाँ के केन्द्र संस्थापक ने हमें भेजा जो यहाँ आये और यहाँ यह उदाहरण इस लिए प्रस्तुत किया गया है कि यदि अन्दर बच्चों के लिए कुछ प्रेरणादायक रचने की क्षमता है जो यह मंच बच्चों के साथ साथ आपका भी है।
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